JNU हिंसा पर बोले एक्टर विजय वर्मा- मंदिर बना रहे हैं राम का, हरकतें सारी रावण की

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Vijay Verma Actor,

(जेएनयू) के कैंपस में दर्जनों नकाबपोश लोहे की रॉड, डंडे से लैस गुंडे-बदमाश घुस गए और कैंपस में छात्रों और शिक्षकों पर धावा बोल दिया। बताया जा रहा है कि ये गुंडे बीजेपी की छात्रा इकाई एबीवीपी के हैं जो कैंपस के बाहर से भी आये थे। हमले के समय गुंडे अपना मुँह ढंके हुए थे।

फ़िल्म पिंक और गाली बॉय में दमदार एक्टिंग करने वाले अभिनेता विजय वर्मा ने ट्वीट करके बीजेपी पर तीखा हमला किया। विजय ने लिखा कि, “मंदिर बना रहे हैं राम का, हरकतें सारी रावण की।”

बता दें कि हमले के दौरान जेएनयू के मेन गेट की स्ट्रीट लाइटें बंद कर दी गई थीं। रात के अंधेरे में दर्जनों गुंडों ने कथित सबसे सुरक्षित राजधानी दिल्ली में तांडव मचाया। इसमें बॉलीवुड के बड़े अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने जेएनयू को अपना समर्थन देते हुए चिंता जताई है। रितेश देशमुख, दिया मिर्ज़ा, तापसी पन्नू, कृति सैनन, ऋचा चड्ढा, मनोज बाजपेयी, आयुष खुराना समेत अन्य लोगों ने जेएनयू के समर्थन में अपनी बात रखी है।

All Hind News Mohammad Abbas

Jawahar Lal Nehru University JNU के छात्रों पर हमला

05 January 2020 All Hind News

JNUSU अध्य्क्ष आइशी घोष,

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि एवं न्यू होस्टल मैन्युल का लगातार विरोध कर रहे है छात्रों पर कुछ नकाबपोश लोगों ने आज शाम अचानक हमला कर दिया।

सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार ये लिखा जा रहा है कि ये हमला एबीवीपी के द्वारा युनिवर्सिटी में घूस कर किया गया है। हमलावर लोगों में एबीवीपी दिल्ली यूनिवर्सिटी के पुर्व अध्य्क्ष का नाम भी बताया जा रहा है।

इस हमले में JNUSU अध्य्क्ष आइशी घोष को सिर में गहरी चोट आई है एवं कई टीचर्स समेत छात्र गम्भीर रूप से घायल हैं

JNUSU अध्य्क्ष आइशी घोष की हालत गंभीर, AIIMS ICU में भर्ती

हमले के विरोध में आम लोगों का दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन

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असम के डिटेंशन सेंटर में 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत, तीन साल में 29 लोग तोड़ चुके हैं दम

Detention Centre,

असम के गोलपारा के एक डिटेंशन सेंटर में रहने वाले 55 वर्षीय व्यक्ति की शुक्रवार को एक अस्पताल में मौत हो गई. पुलिस का कहना है कि उन्हें 22 दिसंबर को उन्हें बड़ा स्ट्रोक होने के बाद गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था. नरेश कोच पिछले तीन वर्षों में डिटेंशन सेंटर में मरने वाले 29वें व्यक्ति हैं. तिनिकुनिया पारा गांव के रहने वाले मजदूर नरेश कोच साल 1964 में बांग्लादेश (उस वक्त पूर्व पाकिस्तान था) से पहले मेघालय आए. इसके बाद वह तिनिकुनिया पारा गांव में रहने लगे, वहां वह 35 साल से रह रहे थे.

साल 2018 तक उन्होंने हर एक चुनाव में मतदान किया है. लगातार चार बार सुनवाई में असफल होने के बाद उन्हें एक विदेशी ट्रिब्यूनल ने 2018 में विदेशी घोषित कर दिया था. नरेश कोच-राजबंशी समुदाय के थे, जिन्हें मेघालय में आदिवासी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन असम में अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने का इंतजार है

सरकार के मुताबिक साल 2016 से लेकर अक्टूबर 2019 तक डिटेंशन सेंटर में रहने वाले 28 लोगों की मौत हुई है. नवंबर महीने में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया था कि ’22 नवंबर 2019 तक 988 विदेशियों को असम के छह डिटेंशन सेंटर में डाला गया है.’ अपडेटेड नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) में लगभग 19 लाख लोगों  को बाहर कर दिया गया था, जो कि 31 अगस्त 2019 में प्रकाशित हुआ था

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Who Was Qasim Sulemani ?

जनरल कासिम सुलेमानी,

अमेरिका के हवाई हमले में ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की मौत ने दोनों देशों के बीच तनाव का नया अध्याय खोल दिया है। मजबूत अमेरिका के खिलाफ ईरान की बदले की बात कहना ये बताता है कि जनरल सुलेमानी उसके लिए कितने अहम थे। साथ ही अमेरिका का रुख भी बता रहा है कि जनरल सुलेमानी को खत्म करना उसके लिए क्यों जरूरी था। आइए जानते हैं कौन थे जनरल सुलेमानी और वह ईरान के लिए कितने महत्वपूर्ण थे। अमेरिका के कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान के लिए जनरल कासिम सुलेमानी बेहद महत्वपूर्ण थे। पश्चिम एशिया के सभी अभियानों को वही अंजाम दिया करते थे। जनरल सुलेमानी को अपने देश और देश के बाहर एक महत्वपूर्ण हस्ती का दर्जा मिला हुआ था। सीरिया और इराक युद्ध में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी।

मिडिल ईस्ट में बढ़ाया ईरान का प्रभाव

मिडिल ईस्ट में ईरानी प्रभाव बढ़ाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। इसके चलते अमेरिका के समर्थक देशों सऊदी अरब और इस्राइल को ईरान का मुकाबला करने में दिक्कते आने लगीं। इससे पहले भी उन्हें मारने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन वह हर बार बच निकले। 20 सालों के दौरान पश्चिम, इस्राइल और अरब देशों की खुफिया एजेंसियां उनके पीछे पड़ी रहीं।

अमेरिका के लिए सिरदर्द थे सुलेमानी

इराक में सुलेमानी की काफी अहम भूमिका थी। इस्लामिक स्टेट के आतंक से बगदाद को बचाने के लिए उनके नेतृत्व में ईरान समर्थित फोर्स का गठन हुआ था। जिसका नाम पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स था। जनरल सुलेमानी अमेरिका के बहुत पुराने दुश्मन थे। 1980 के दशक में ईरान और इराक के बीच हुई खूनी जंग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस युद्ध में अमेरिका ने इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन का साथ दिया था।

तैयार किया था पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स

इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन का मुकाबला करने के लिए उन्होंने कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट किया था। इराक में ईरान के समर्थन से तैयार पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स को जनरल सुलेमान ने ही तैयार किया था। उनका मारा जाना ईरान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

बगदाद हवाई अड्डे पर हमले में मारे गए

इराक की राजधानी बगदाद में हवाई अड्डे के पास हुए अमेरिकी हवाई हमलों में ईरानी मेजर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई है। मिसाइल से किए इस हमले में कम से कम आठ लोग मारे गए हैं। वहीं पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सिज (पीएमएफ) के डिप्टी कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस भी मारे गए हैं।

जनरल कासिम को अमेरिका ने बड़े दुश्मनों में शामिल किया जाता था।

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अब हमारे लिए नया साल और नई सुबह तभी होगी जब सरकार CAA/NRC/NPR के काले क़ानून को वापस लेगी : मोहम्मद अब्बास, सामाजिक कार्यकर्ता

मैं कोई नए साल की मुबारकबाद नाहीं दूंगा और न किसी से लेना चाहूंगा,,
जब शदीद ठंड की सर्द रातें मज़लूमों के जूलूस की गवाह बन रही हों,,

जब अपने ही वतन में अपने वजूद की लड़ाई लड़ने वालों के लिए
पुलिस की लाठियां और बन्दूकें क़हर बन कर टूट रही हों,,

जब हर उमर के इंसानों का झुंड पुलिस की बर्बरता से बेख़ौफ़ सड़कों पर अपने हक़ के लिए नारे लगा रहा हो,,

लगभग माइनस तापमान में भी जब औरतें दूध पीते मासूम बच्चों को गोद में लिए अपने अस्तित्व की लड़ाई में
खुले आसमान के नीचे रात बसर करने पर मजबूर हों,,

जब एक कमज़ोर लाचार इंसान अपना आशियाना छिन जाने के डर से जान हथेली पर रख कर घूम रहा हो,,

जब करोड़ों की आबादी को सर से छत और पांव तले ज़मीन खिसकती नज़र आ रही हो,,

जब देश पर जान निछावर करने वालों से ही देशवासी होने का सर्टिफिकेट मांगा जा रहा हो,,

ऐसे माहौल में नए साल की मुबारकबाद मुंह चिढ़ाती है,,
अब हमारे लिए नया साल और नई सुबह तभी होगी जब सरकार CAA/NRC/NPR के काले क़ानून को वापस लेगी,

ये अंधेरा छटेगा तो सुबह होगी

अमित शाह ने जनता को भ्रमित किया : मोहम्मद अब्बास

मोहम्मद अब्बास सामाजिक कार्यकर्ता,

हमारे प्रधान मंत्री जी ने कह दिया की अभी कोई NRC नही आएगा… हमने तो NRC की बात ही नही की.. लोगों को डराया जा रहा है गुमराह किया जा रहा है
अगर प्रधानमंत्री जी की बात मान ली जाए कि NRC नही आ रहा तो इसका मतलब ये हुआ कि अमित शाह झूठ बोल रहे थे। क्योंकि अमित शाह ने हर जगह कहा कि CAA और NRC आएगा जिसमे लोगों को अपनी नागरिकता प्रूफ करनी होंगी। वोटर id, आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि को नागरिकता का प्रूफ नही माना जायेगा। उनके इन्ही बयानों की वजह से लोग परेशान हो गए। असम में NRC के बाद का हाल देख कर लोग अपने लिए सड़कों पर उतर गए।
अमित शाह ने जनता को भ्रमित किया है उनके बयान की वजह से ही जगह जगह प्रोटेस्ट हुए… जामिया और अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के हाथ पैर टूटे, सर फटे, आंखें फूटी… यूपी में कितनो के घर लुटे… दर्जनों की जानें गई. इन हत्याओं के ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ अमित शाह हैं। देश में अराजकता का माहौल पैदा करने के लिए सरकार को अमित शाह से उनका पद वापस लेना चाहिए। अमित शाह के बयानों ने ही पचसों जाने ली हैं जिसके लिए उन पर केस होना चाहिए और कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश में गुंडाराज, प्रियंका के साथ हुई धक्कामुक्की, लगाया जाए राष्ट्रपति शासन: कांग्रेस

कांग्रेस ने लखनऊ में प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ पुलिस द्वारा ‘‘धक्कामुक्की’’ किये जाने और राज्य में गुंडाराज होने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। पार्टी प्रवक्ता सुष्मिता देव ने यह भी कहा कि प्रियंका के साथ पुलिस ने जो व्यवहार किया है उसकी जांच भी होनी चाहिए।

उधर, प्रियंका के कार्यालय ने इस मामले में सीआरपीएफ के महानिदेशक को पत्र लिखकर इस मामले का संज्ञान लेने और कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

दरअसल, गांधी परिवार को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है उनके आसपास सीआरपीएफ जवानों का सुरक्षा घेरा होता है।

ममता बनर्जी – जब तक मैं जिंदा हूं, बंगाल में NRC लागू नहीं होगा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर नागरिकता संशोधित कानून को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ममता ने शुक्रवार को कहा कि जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक बंगाल में नागरिकता संशोधित कानून (सीएए) लागू नहीं होगा। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता ने नैहाटी में एक कार्यक्रम में कहा कि कोई भी देशवासियों से नागरिकता जैसे उनके अधिकार नहीं छीन सकता।ममता ने विवादित सीएए के खिलाफ देशभर में चल रहे छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि यह कैसे हो सकता है कि वे 18 साल की उम्र में सरकार चुनने के लिए मतदान तो करें, लेकिन उन्हें विरोध करने का अधिकार न दिया जाए।

बनर्जी ने कहा जब तक मैं जीवित हूं तब तक बंगाल में सीएए लागू नहीं होगा। कोई भी देश या राज्य छोड़कर नहीं जाएगा। बंगाल में कोई निरोध केंद्र नहीं बनेगा। उन्होंने कहा छात्र काले कानून का विरोध क्यों नहीं कर सकते? केंद्र सरकार प्रदर्शकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और उन्हें विश्वविद्यालयों से निष्कासित कर रही है।

रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया

वहीं, ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में कहा कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ ने देशवासियों को एकजुट रहने के लिए प्रेरित किया है। ममता ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया जिन्होंने ‘जन गण मन’ की रचना की। 1911 में आज के दिन पहली बार इसे गाया गया था।

ममता ने टैगोर की रचना ‘आमार सोनार बांग्ला’ का भी जिक्र किया जिसे 1905 में अंग्रेजों द्वारा बंगाल के विभाजन के विरोध में लिखा गया था। उन्होंने कहा कि बंगाल के विभाजन के खिलाफ टैगोर के विरोध के तरीके ने लोगों को रास्ता दिखाया।

उन्होंने ट्वीट किया, 1911 में आज के दिन पहली बार ‘जन गण मन’ गाया गया था। हमारे राष्ट्रगान ने हमें वर्षों से एकजुट किया है और राष्ट्र को प्रेरित किया है। इसका रचना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। वह हमारी शान हैं।

‘जन गण मन’ पहली बार कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।

NRC के लिए डेटाबेस का काम करेगा NPR, इसका विरोध होना चाहिए: अरुंधति रॉय

लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का विरोध करने का आह्वान करते हुए बुधवार को दावा किया कि एनपीआर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के लिए डेटाबेस का काम करेगा. दिल्ली विश्वविद्यालय में एक विरोध सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी दावा किया कि एनआरसी का लक्ष्य देश के मुस्लिम हैं. रॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एनआरसी मुद्दे पर झूठ बोलने का आरोप लगाया.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहले ही कहा था कि एनपीआर और एनआरसी के बीच कोई संबंध नहीं है और उनके डेटाबेस को एक दूसरे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. एनपीआर के लिए 2010 में डेटा एकत्रित किया गया था जिसे 2015 में अद्यतन किया गया था. रॉय ने कहा कि एनपीआर के अंतर्गत अधिकारी लोगों के घरों तक जाकर उनका नाम पता और अन्य जानकारी एकत्रित करेंगे.

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “वे आपके घरों तक जाएंगे, आपका नाम, फोन नंबर और आधार ड्राइविंग लाइसेंस जैसे कागजात के बारे में पूछेंगे. एनपीआर एनआरसी का डेटाबेस बनेगा. हमें इसके खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से लड़ना होगा. जब वे एनपीआर के लिए आपके घर आएं तो आप उन्हें दूसरा नाम बता दें. पते के लिए आप उन्हें 7 आरसीआर बताएं. हमें दबाने के लिए बहुत सारी ताकत लगेगी. हम लोग लाठी और गोली खाने के लिए पैदा नहीं हुए हैं.”

रॉय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर यहां रविवार को रामलीला मैदान रैली में एनआरसी प्रक्रिया के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाया. रॉय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने झूठ बोला कि देश में डिटेंशन सेंटर या हिरासत केंद्र नहीं हैं. उन्होंने कहा, “पकड़े जाएंगे यह जानते हुए भी उन्होंने (प्रधानमंत्री) झूठ बोला क्योंकि उनके पास मीडिया है जो उनसे सवाल नहीं पूछेगा.”

रॉय ने कहा कि जो संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं उन्हें विभिन्न राज्यों से बाकायदा आश्वासन लेना चाहिए कि वे इस प्रावधान को लागू नहीं करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में सीएए और एनआरसी का व्यापक स्तर पर विरोध होने के बाद सरकार इसके प्रावधानों को एनपीआर के जरिए लागू करवाना चाहती है.

रॉय ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस मुस्लिमों पर हमला कर रही है और उनका दमन कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस मुस्लिमों के घरों में घुसकर लूट मार कर रही है. रॉय के अनुसार सीएए और एनआरसी मुस्लिमों के अलावा दलितों, आदिवासियों और देश के गरीब लोगों के भी खिलाफ है

उत्तर प्रदेश में बड़ी राजनीतिक लड़ाई का प्लान बना रही हैं प्रियंका गांधी

खास बातें

  • राहुल गांधी पहले ही दे चुके हैं संकेत
  • प्रियंका हो सकती है उ.प्र. में कांग्रेस के भावी मुख्यमंत्री का चेहरा
  • जिला, ब्लाक स्तर पर कांग्रेस को मजबूत बनाने की पहल
  • राहुल का रहेगा साथ, लेकिन लीड करेंगी प्रियंका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी यूपी में एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़ना चाह रही हैं। उन्होंने करीब-करीब इसका खाका तैयार कर लिया है। सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी के इस अभियान से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहमत हैं। इस अभियान में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रियंका का सहयोग करेंगे, लेकिन पूरे अभियान को लीड प्रियंका ही करेंगी। यूपी कांग्रेस कार्यालय के वरिष्ठ सूत्र के अनुसार नए साल में नए आगाज के साथ कांग्रेस पूरे प्रदेश में गांव, ब्लॉक, जिला स्तर पर संगठन को मजबूती देकर प्रदेश स्तर तक यूपी सरकार को चुनौती देना शुरू कर देगी। प्रियंका गांधी की पहल पर यूपी में कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कयासों से अलग अजय कुमार लल्लू का चेहरा चुना। प्रदेश अध्यक्ष लल्लू प्रदेश कांग्रेस की टीम बना चुके हैं। केवल कुछ फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के प्रभारियों की घोषणा होनी है। पांच-छह दिन में ये नाम भी घोषित हो जाएंगे। लल्लू हर कदम पर प्रियंका गांधी की राय लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं पहली बार एक साथ 43 जिलों में कांग्रेस पार्टी ने अपने नए अध्यक्ष बनाए हैं। 5-7 जिलों के अध्यक्ष बनने शेष हैं। इनकी घोषणा भी दो सप्ताह के भीतर हो जाएगी।  सूत्र बताते हैं राज्य में जिला अध्यक्षों की घोषणा होने से पहले कांग्रेस महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष ने एक-एक चेहरे को तय करने में काफी होमवर्क किया है।

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